बीत गए वो दिन

आज जिन्दगी की कसमकश में हमने अपनी उन अपनी पुरानी यादों को पीछे छोड़ डाला जहाँ  हमारे मन का कोई कोना आज भी वही बसता है , माँ के हाथों का खाना हो या , दोस्तों के संग की शरारत , पिताजीका डाटना हो या अपने गाँव की खेतो की हरयाली , खुशिओं का कलरव , कैसी वो होली , वो बीती दीवाली धुंधली पर गई यादें सारी…॥

Hindi Poem on Time Left Gone

वक्त तो बढ़ रहा पर मुझे लगता जरा ठहर के,
छोड़ आया पीछे खुद को; बस यादें रही शहर के,
सुबह तो आज भी होता यहाँ पर वो पंछी नही डगर के,
शाम तो हुई यहाँ भी पर सूरज टँगा रहा ऊपर अम्बर के !

बंद आंखें ढूँडती जरूर उस लहर को ,
जो हमने ख़ुद छोड़ा था किसी पहर पर ,
क्या लौटेगी वो कभी मेरी नजर पर या ,
गुम हो जायेगी सब जो यादें है मेरे शहर के !

Written & Posted By : Sujit Kumar Lucky (सुजीत कुमार लक्कीं)

 

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज

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