Poetry

बीत गए वो दिन

आज जिन्दगी की कसमकश में हमने अपनी उन अपनी पुरानी यादों को पीछे छोड़ डाला जहाँ  हमारे मन का कोई कोना आज भी वही बसता है , माँ के हाथों का खाना हो या , दोस्तों के संग की शरारत , पिताजीका डाटना हो या अपने गाँव की खेतो की हरयाली , खुशिओं का कलरव , कैसी वो होली , वो बीती दीवाली धुंधली पर गई यादें सारी…॥

Hindi Poem on Time Left Gone

वक्त तो बढ़ रहा पर मुझे लगता जरा ठहर के,
छोड़ आया पीछे खुद को; बस यादें रही शहर के,
सुबह तो आज भी होता यहाँ पर वो पंछी नही डगर के,
शाम तो हुई यहाँ भी पर सूरज टँगा रहा ऊपर अम्बर के !

बंद आंखें ढूँडती जरूर उस लहर को ,
जो हमने ख़ुद छोड़ा था किसी पहर पर ,
क्या लौटेगी वो कभी मेरी नजर पर या ,
गुम हो जायेगी सब जो यादें है मेरे शहर के !

Written & Posted By : Sujit Kumar Lucky (सुजीत कुमार लक्कीं)

 

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/

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