Poetry

बिखर सा क्यूँ गया !


ख्वाब है ..जिसको सजाने की चाहत,
या झुंझलाहट है इस तोड़ देने की !

चल ही दिया दो चार कदम तो क्या,
बीता ही कुछ पल साथ तो क्या !

सब कहके लौट गये मायूसी से,
अनजान हूँ में, हर बातों से अब !

ये वक्त जो बिना दुआओं से मिला,
माँगा इसे तो बिखर सा क्यूँ गया !

हार तो हर पल की ही है,
दाव ही रूठे मुक़द्दरों पर था !

अहसास शब्दों में रोज बाँट देता,
अब फिर लब्ज कहाँ से ले आऊ !

चुप सा हूँ पर गुमनाम नहीं,
बिखेरा है खुद को इस तरह,

हर पल,
समेटेंगे सब खुशियों के खातिर !

$K

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/