Poetry

बरसों सावन – Waiting For Rain

कैसे सावन आये तुम बिन गहने !
छितिज धरा सब धुल उराये,
नभ के बदल बन गये पराये,

उमड़ घुमड़ तुम आते ऐसे !
कसक मन की भी जाती जैसे,
जग चर की तुम तृष्णा मिटाते,
सूखे नयनों में आके नीर गिराते,

पर आये सावन बिन तुम गहने !
कोई जैसे चुप चुप से लगे रहने ..!
बेकल मन, सुने सपने …
बरसों सावन अब मेरे अँगने !

सुजीत भारद्वाज

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/