Poetry

ठहर जाने का सबब !

कहते कहते ठहर जाने का सबब,
फिर वही बातें, वही रातें !

चाँद सी सादगी दिखती ऐसी,
फिर वही अजनबीपन छाया ..
शब्द घुटते रहे, करते रहे अदब !

थे बेबाक अनेकों वहाँ हुजूम में,
उम्रदराज सी आँखे लिये पल भर,
जी भर के देख मासूम था चाँद,
अब भी वहीँ !

फिर सिमटे लब्जों के ढेर लिये ..
क्यों या क्या पूछुं ..
बस ऐसे ही था हर दफा;
कहते कहते ठहर जाने का सबब !

#SK 
Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/