Poetry

ठहर जाने का सबब !

कहते कहते ठहर जाने का सबब,फिर वही बातें, वही रातें ! चाँद सी सादगी दिखती ऐसी,फिर वही अजनबीपन छाया ..शब्द घुटते रहे, करते रहे अदब ! थे बेबाक अनेकों वहाँ हुजूम में,उम्रदराज सी आँखे लिये पल भर,जी भर के देख मासूम था चाँद,अब भी वहीँ ! फिर सिमटे लब्जों के ढेर लिये ..क्यों या क्या […]