Poetry

चौथे पहर की अधूरी बातें


कुछ अधूरी सी लगती है बात,
देखता हूँ रात में लिपटी,
चाँद की उस सूरत को,
जो आज अधूरा ही आया था…

सन्नाटे छूती जाती चुपके से,
बावरे से बयार उठते है,
और छु जाते है हाथों को,
और रह जाती चौथे पहर की अधूरी बातें,
अब अधूरा चाँद भी खो जाता,
धुँधली रातों के तले अधूरा मन भी सो जाता !

नयी सुबह की अपनी उम्मीदे ..अपने फलसफे ..
मन भटकता कभी यहाँ ..कभी वहाँ !

सुजीत 

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/

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