Poetry

चंद सिक्के – Night & Pen

वक्त निकल रहा यूँ अपनी रफ़्तार से;
सांसे भी खत्म हो रही अनगिनत रोज,
जिंदगी बदल भी रही, आगे भी बढ़ रही;
जब सोचता हूँ आगे एक दशक की बातें,
लगता एक इंतेजार तो है जो इस सफर में,
मुझे ढो के ले जायेगा, उस गंतव्य तक जो बस सपनों में ही बना है !

आगे जब भी कठिन क्षणों को देखता सोचता;
लगता ये रास्ता बता रहा …
इस दिल में अभी और जख्मो की जगह है !
दो चार शब्द हँसी के ही, तुझे खास बनाता ;
बड़े ही गंभीर जिंदगी के सोचों के बाद उसने ये कहा;
कहाँ जिंदगी तो बसर ही हो रही,
चंद सिक्के है जिन्होंने अपना मोल अभी नही खोया –
“हँसी ..यादें ..और उनमें जीये मेरे लम्हें..”

इतना कहकर वो रात की बात में खो गया फिर नींद के आगोश में !

In Night & Pen : ‪#‎SK‬ ( Aug-7-2013 ) — feeling :Before Dawn.

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/