कुछ अनकहे (Untalked) – Night & Pen

छोटी सी बात ये, कोई नयी नहीं थी; 

ऐसे तो इतने दूर के रास्तों में कितनी नोक झोंक थी !
कुछ कहे कुछ अनकहे, 
अनेकों इतने लम्हें के सिलवटों में दबी सिमटी सी कितनी ही बेवक्त यादें !

खुद से बेहतर समझने ना समझने की बात; 

कैसे मैं किस पल समझाने की नाकाम कोशिश करने लगता,
मैं उस पल तलाश करता रहा तुम्हें,
 जिस कुछ पल के लिये खुटी पर टांग दी थी जिंदगी हमने !

छोटे छोटे कई शब्दों के टुकड़े, 

थक सा जाता जोड़ते जोड़ते इन्हें;
माना आज कहा नहीं कुछ भी हमने, 
ना मशरूफियत है इस रात में कोई ..

हाँ खमोशी के पल है इस तरफ,

देखो तो आके जानों तुम अब भी,
गूँजती आवाज में कुछ नाम है ! 
कब समझा पायेंगे ये सब ..

अब रात है कल सुबह और फिर धीमी पर जायेगी ये शांत नम हवाएँ ..
फिर एक उमस भरी जिंदगी की दुपहरी होगी अनवरत ……

 In Night & Pen $K

 — feeling Untalked.

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज

1 thought on “कुछ अनकहे (Untalked) – Night & Pen

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    (April 20, 2014 - 11:28 pm)

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