winter poem
Poetry

धुंध में अजनबी

धुंध के दोनों पार बैठे हम वहम भी है होने का और नहीं भी तुम भी बोलते कभी कभी कभी कभी कुछ मैं भी कहता हूँ धुंध में खोये दो अजनबी से ओस की चादर के उस ओर से इस पार खींच पाता तो एक गर्माहट सी होती रिश्तों की ! ये धुंध भी न […]

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शीत की आँगन !

सर्द हवाओं ने ये महसूस कराया; फ़िक्र लौट आयी थी उनकी आज ! फिर कुछ सरसरी हवा छु गयी होगी, फिर अब बचपन लौट गयी होगी ! ना मानी होगी बात फिर किसीकी, हो आये होंगे गलियों में यूँ ही ! कुछ शरारतें कुछ बेबाक सा मन, भागती फिरती चहकती शीत की आँगन ! आ […]

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पूस के मेले – Winter @ India

लगे खेत में पूस के मेले, सरसों अरहर मस्ती में खेले ! ठीठुरी पुरवा पवन बहके है हौले..अलसी व गेहूँ की बालियाँ डोले ! विहंग तरंग बांस पर झूले,खेत पर जाने अलसाते भूले ! आग लपेटे अलाव पर जब बोले,शाम समेटे कई किस्सों को खोले ! धुप धुंध से आंख मिचोली खेले,निर्जन मन कैसे इस […]