Poetry

Morning Again ..!

शब्द जब रंग मंच पर उतरे !
अपने अपने किरदार को खेले !

में खरा वहाँ मुसकाता रहा,
हर उलझन को सुलझाता रहा !

ये आहट किस और से आती है !
मंजिल ना नजर अब आती है,
बस रस्ते पर ले जाती है !

इच्छाओं की झोली में जीता,
इस बार भी ये बसंत यूँ बीता !
निर्जन पथ पर, कभी जो सोता !

जब ..!

रात अनंत बन जाती है ..
इस जीवन को जीवंत बनाने ..
एक सुबह फिर आस जगाती है !

– : सुजीत भारद्वाज

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/