Poetry

प्रेम …

Loveमैं उससे लड़ता हूँ,
की थोड़ी सी ख़ामोशी तो हो,
तुझे सोच सकूँ किसी नज्म की तरह,
और तुझसे कहूँ तू खूबसूरत है शब्दों सी !

अल्लहड़ जैसे हरदम बोलना,
जैसे हवा आयी हो खिड़की से
और मेज पर से सारे पर्चे उड़ा गयी !

हरदम जिद और जिरह की बातें,
जैसे कोई शरारती बच्चा हो,
माँ की हर बातें दुहरा रहा हो !

नकारना प्यार की बातें,
और हाथ छूने पर झिरक देना,
जैसे लाज से नहायी हुई स्त्री,
कुछ दूर जाके खड़ी हो गयी !

ऐसे कभी देखा नहीं तुम्हें संगीन होते,
हाँ कभी कभार पूछते हो प्रेम क्या है ?

#SK

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/

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