Life Stopped Poetry

थम गये हैं ..

Life Stopped Poetryथम गये हैं हम और तुम भी ;
नहीं थमा ये वक़्त का पहिया ;
चलता रहा दुर जाता रहा ;
अब सफर के दो दिशाओं में ;
मुमकिन न होगा मिलना !

पैगामों की आवाजाही भी बंद है,
न ही अब खतों के पुर्जे उड़ा करते,
हवायें मतवाली सी हो उठती तो,
खिड़की की छड़ों पर जा बैठती,
पाती तेरे नामों वाली ;
थोड़ी फरफराहट कर जैसे
लबों से नाम कह जाये तुम्हारा,
मैं झट से पकड़ लेता,
मोड़ कर तकिये की नीचे रख देता,
रात में फिर पढूँगा पुराने खतों को,
नया लब्ज देके मैं ।

एक हाथ दे दो,
खींच लो इस वक़्त से हमें,
बस थम गये हैं हम और तुम भी !

– Sujit

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज

2 thoughts on “थम गये हैं ..

    gyanipandit

    (May 4, 2015 - 3:35 am)

    great collection..inspiring as previous collection!

    Sujit Kumar Lucky

    (May 4, 2015 - 7:04 pm)

    Thanks a lot !

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