set free your words
Poetry

लब्जों को ढील दो ….

set free your wordsथोड़ा लब्जों को ढील दो ;
आके मुझसे वो बातें कर ले ;
तेरे कहने पर ही वो आयेंगे ;
जाने तुम आँखें दिखाते होगे;
किसी पराये के तरह वो रहते है ;
सामने बस घंटों देखा करता,
न बोलते न सुनते वो कुछ,
लब्जों को भी तुमने सीखा दिया,
जाने कैसे अपना सा बना दिया तुमने,
सूखे से कंठों से होठों से,
कोई स्वर ही नहीं फूटा है,
फिर दो लब्ज लौटते तो,
मैं कुछ तो बातें करता उनसे,
कह देता मैं वो सब कुछ,
जो दफ़्न सा है एक राज की तरह,
टूट ही जाती लम्बी सी ख़ामोशी,
जो तुम थोड़ा लब्जों को ढील देते !

Poetry : Sujit Kumar

Insane Poet - Sujit Kumar

 
 

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/