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no mad

खानाबदोश….

अलग अलग मंजिलों पर रहता मैं, कभी जिंदगी की तन्हाई तलाशने, ऊपर छत पर एक कमरा है, पुराना रेडियो पुरानी कुर्सी, और धूल लगी हुई कई तस्वीरें, जिंदगी से ऊब कर बैठता जा मैं उस मंजिल पर, कभी तलघर वाली मंजिल पर चला जाता, मकड़ी के जालों में सर घुसा ढूँढता हूँ बचपन की चीजें, […]

खोखला आदमी ..

करता जिंदगी की बातें वो, बड़ी बड़ी वसूलों की फेहरिस्त लोग सुन के सोचने लगते थे बदल जाती थी कई की जिंदगी कुछ खाली खाली लोग उससे मिल भर जाते थे उम्मीदों की बातों से ; सब कहते जाने क्या क्या भरा है, उसके इस मन में ; उसे भी लगता वो भरा हुआ है […]

dads diary

लुका-छुपी ….

बचपन का एक कौतुहल जो हर बच्चा अपने माँ के आँचल में सीखता, चेहरा छुपाना, फिर शरारत भरी नजरों से देखना की सब उसको देख रहे या नहीं, कभी कभी जब चेहरे से आँचल को नहीं हटा पाता उलझ जाता तो अपने गुस्से को जाहिर करना कि कोई उसकी मदद करें, बच्चों के इस लुका […]

उजाड़…

उजाड़ दिन , जैसे कुछ किताबें इधर उधर हो बिस्तर पर , कपड़े मुड़े सिमटे फेंकें हुए , क्या कहाँ किस ओर क्या पता , घण्टों खोजो तो न मिलता कोई सामान , ये थे उजाड़ घर के कुछ अस्त व्यस्त कमरे । अनबन, आधे अधूरे मन से बातें, बेरुखी, तकरार और जिरह ही जिरह, […]

Summer fashion explained by one of the most popular fashion expert

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rain childhood

बचपन और बादल

जब भी बादल छाता है मेरा बचपन लौट जाता है ; वो कागज की नाव, वो छोटी सी छतरी , भीगे से जुते, बारिश में खेल, वो गिरना फिसलना , गंदे से कपड़े , बिगड़ी सी सूरत, माँ की फटकार, फिर थोड़ा सा प्यार, बस उम्र बढ़ी थोड़ी , ये बचपन और बादल ; कुछ […]