inbox love of insane poet
Poetry

इन्सेन पोएट – Inbox Love 5

हेलो .. किसी ख्यालों से निकल कर अभिवादन तक जाता उसके पहले ही ; नमस्कार मिस्टर कवि ; उत्तर में “हाय” कोई कवि सब नहीं हूँ , अच्छा फिर इतनी कविताएँ । वो मन में जो आता लिख लेता ; कोई कवि सम्मेलन मैगज़ीन पत्रिका वाला नहीं हूँ । कुछ झिरकते हुये कहा । अच्छा […]

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Will You Be My Friend Again ? – Inbox Love 4

विल यु बी माय फ्रेंड अगेन ? क्या फिर से तुम मेरे दोस्त बनोगे ?? दोस्त तो हम है ही, नहीं फिर से वैसे ही जैसे हम थे लेकिन जैसे हम अभी नहीं है । फिर से उसी तरह सुबह को रोज नए ढंग से जगाते हुए  हर शाम की तेरी उदासी को बहलाते हुए […]

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Love in Inbox – #इनबॉक्स_लव – 3

कुछ नहीं.. क्या कुछ नहीं ? नहीं नहीं फिर भी ?? एक ख़ामोशी के संवाद के लौटने तक ; स्तब्ध सन्नाटा जैसे शब्द बंधन तोड़ निकलना चाह रहे , पर निकल ना सके ; पसरी ख़ामोशी को तोड़ते हुए ; बनावटी से शब्दों से ; बस ऐसे ही .. “कुछ नहीं ” !! और तब […]