Monthly Archives: February 2015

inbox love of insane poet

इन्सेन पोएट – Inbox Love 5

inbox love of insane poetहेलो ..
किसी ख्यालों से निकल कर अभिवादन तक जाता उसके पहले ही ;
नमस्कार मिस्टर कवि ;
उत्तर में “हाय”
कोई कवि सब नहीं हूँ ,
अच्छा फिर इतनी कविताएँ ।
वो मन में जो आता लिख लेता ;
कोई कवि सम्मेलन मैगज़ीन पत्रिका वाला नहीं हूँ ।
कुछ झिरकते हुये कहा ।

अच्छा फिर कैसे कवि ?
वो “इन्सेन पोएट” जैसा ;
मन से लड़ता और लिख देता ।

विषयान्तर के साथ फिर कुछ सवाल ..
छोड़ो ये सब , इतनी रात को सोये नहीं !

बेमन से जवाब देते हुए ~ नहीं किसी के जवाब आने का इन्तेजार कर रहा ! रोज ही करता !

तो जवाब आता ?
नहीं ..
ये ऑफलाइन चैट बंद करके रखने पर  कोई क्या जवाब देगा ?

नहीं वो ठीक है । पता है उन्हें , मौजूदगी महसूस हो जाती ! ऑफलाइन रहने पर भी !

ऐसे अनजाने संवाद का मन भी नहीं था , बस प्रतिउत्तर में कहे जा रहे थे ।

उपहास और व्यंगय था जैसे “तो अब भी जवाब आया या नहीं ” ??

नहीं .. के साथ पसरती ख़ामोशी बीतते रातों के साथ संवाद पर छाती चली गयी ।

Inbox Love Bring By – Sujit

Inbox Love

Will You Be My Friend Again ? – Inbox Love 4

Inbox Love
विल यु बी माय फ्रेंड अगेन ?
क्या फिर से तुम मेरे दोस्त बनोगे ??
दोस्त तो हम है ही,
नहीं फिर से वैसे ही जैसे हम थे लेकिन जैसे हम अभी नहीं है ।
फिर से उसी तरह सुबह को रोज नए ढंग से जगाते हुए  हर शाम की तेरी उदासी को बहलाते हुए ;
हर रात को थपकियों से सुलाते हुए ।
फिर वैसे ही सब …
कुछ अनमने अटपटे से बातों की ख़ामोशी मन में उमड़ते रहे ; उसके भी मेरे भी ।
फिर हाँ ठीक है – यस आई विल !
धीमे धीमे से कहना रोक नहीं पाया
” बन पाओगे .. फिर वैसे ही .. शायद नहीं “
ऐसा क्यों कहा ?
पता नहीं बस ऐसे !
मन ही मन गुनगुनाने का मन करने लगा “आँख से दूर ना हो दिल से उतर जायेगा ” ।।

Inbox Love Bring By – Sujit

Read –  Love in Inbox Part – 1   Love in Inbox Part – 2  Love in Inbox Part – 3

inbox love

Love in Inbox – #इनबॉक्स_लव – 3

कुछ नहीं..
क्या कुछ नहीं ?
नहीं नहीं फिर भी ??
एक ख़ामोशी के संवाद के लौटने तक ;
स्तब्ध सन्नाटा जैसे शब्द बंधन तोड़ निकलना चाह रहे ,
पर निकल ना सके ;
पसरी ख़ामोशी को तोड़ते हुए ;
बनावटी से शब्दों से ;
बस ऐसे ही .. “कुछ नहीं ” !!

inbox-love

और तब ..
क्या और ?
हाँ क्या ?
तो फिर !
संवाद के आगे क्या ;
नजाने क्या ; पता नहीं लेकिन ,
और तब एक गुजारिश है शायद ;
शब्दों का सिलसिला रुके नहीं ;
थमे नहीं ; रुके नहीं ये कारवां ;
कुछ कहते रहो ;
कुछ भी नहीं है कहने को ;
फिर और तब ..
से आगे की कुछ बात !!

Inbox Love Bring By – Sujit

Read –  Love in Inbox Part – 1 

Read –  Love in Inbox Part – 2

Love Life memories

It will always be with me …

Love Life memoriesYou could have come back;
But you did not …
After such a long time,
Would be nice to meet you again …
But that did not happen !

Your face was embedded in my mind,
Now they are fading …
I afraid,
Someday maybe it will disappear completely …
It is happening !

I have collected all your pictures,
It was your memories..
How much i understand you,
You will never know !

You Can take yourself away,
But not you memories,
It will always be with me !

Sujit

photo credit: Art: watercolour 2009:…light of a dream…or hope for a new love… via photopin (license)