Poetry

शीत की रातें – Autumn Back

सीधी सपाट सड़को के किनारे,
कुछ खंडर किले सा झलका,
नीली रौशनी से भींगा छत उसका,
कुछ बरखा ओस ले आयी,
हवा सनसन ठंडक भर लायी !
हल्की भींगी ओस नहायी रातें,
और हवा भी कहती ऐसी बातें,
शिशिर सिरहाने कदम जो रखा,
चाँद गगन में थोरा सा बहका,
हाथों में हाथों को मिलाये,
सखे संग से बात बढ़ाये !
सर्द हवाओं ने मेरे संग यूँ खेला,
मौन मौसम ने अब रंग खोला !
शांत शरद शीत की रातें..
मन शिशिर संग अब कैसी बातें ??
Sujit
Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/