Poetry

पुराना रिश्ता – Night & Pen

उसने कुछ पूछा ..
आदत तो ऐसे चुप रहने की ही थी,
कम बोलना, चेहरे ऐसे जैसे शब्द दफ़न हो वर्षों से ;
यूँ तो ये रात अक्सर साथ देती है मेरा,
बयाँ करता शब्दों को,
तेरी कशमकश मुझे खमोश करती रहती हमेशा !

हाँ अक्सर शब्दों का थमना वही से शुरूवात करता ;
जब जब उसकी यादों की दस्तक होती;
और हुआ भी इसी तरह, कुछ लम्हों के बीत जाने के बात;
एक छोटा सा शब्दों में लिपटा जवाब;
मैंने पढ़ के भी जाने दिया ….
ये बीते लम्हों के बाद के चीजें क्योँ मुझे,
अर्थहीन सी लगती, ये किस्सा तो दशकों का था !

पता नहीं तर्कसंगत है भी नहीं ..
पुरानी चीजे कमजोर पर जाती ..
ये रिश्ता भी अब पुराना हो चला था .. !

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/