Poetry

थोड़ी फुरसत दे ए जिंदगी ..City Life

थोड़ी फुरसत दे ए जिंदगी ..
कहीं तो जाके ढूंड लाऊ खुद को,
खुद अपने से सिसकता वक्त की टिक टिक सोने नही देती,
ये मुखोटे लगाये इंसानों के शोर अब जीने नही देती !
नही देखा पता इन अंधेरो के चीरते प्रकश स्तंभों को ,
पराये से आंखे दिखाते है ये हमारी आँखों में घूर के !
किन चौराहों पर रुकते, की लोग आते है यहाँ,
सुना है लोग ऑनलाइन, जिंदगी ऑफलाइन हो गयी !
जब भी भाग के जाते कई हाथ बढ़ते थे आगे,
पर मेट्रो सवार जिंदगी अब मन के अंदर से गुजर गयी !
कैसे बचोगे इस मौसमी तुफानो से …
रुखाई के तूफान अक्सर उठते है इन शहरों में !
रचना : सुजीत कुमार लक्की
Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/