थे साथ कभी – All Together ??

इन राहों से कितने बिछड़े,
जहाँ हर सुबह महफ़िल बनती थी,

पूछते थे खबर हर यारों की,
तेरे रंग मेरे रंग बादलों सी सजती,
मन सपने बुनती संवरती..
और फिर धुँधली सी परती !

क्या में क्या तु, क्या कोसे किसको,
तेरी नियत मेरी फिदरत..
जाने कब कैसी किस्मत !

लौट आना मेरी गली कभी,
या मिल जाना किस मोड़ पर सभी !

चलो एक आयाम बनाते फिर..
अपनी अपनी आसमाँ का..
दूर दूर हर तारे होंगे,
कुछ मेरे कुछ तुम्हारे होंगे !

फिर सोचते कभी कभी ..?
खुश थे दुखो की जन्नत में सही,
बस …
वक्त को अपना कुनबा ही रास ना आया !

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज