Poetry

जिन्दगी बसर जरुर हो जायेगी – Life Left To Go

उलझनों भरी राहें ऐसी..
मंजिल से अनजान बन,
जिन्दगी बसर जरुर हो जायेगी !

आदतन रात की गोद में सर रख,
ज्यों ही कुछ सोचते,
और सुबह हो जाती,
ये बड़ी वक़्त पाबंद घढ़ीयाँ,
कुछ रुक रुक के क्यूँ नही चलती !

रोज टूटता मकसदों के मोह में,
और शाम को एक पथिक सा बन,
जिसे वर्षों से गुजरते गुजरते इन गलियों से,
कोई चाह नहीं हुई, उसे प्यारी नही ये गलियाँ !

यादों से रोज कह लेता था वो किस्से,
हर दिन के, सुबह और शाम वाले,
अब बिखरे किस्सों को हिचक जाता कहने से !

सोचता यादों के बिना मंजिल नहीं कोई,
जिन्दगी बसर जरुर हो जायेगी !

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/