Poetry

चल दौड़ लगाये एक बार फिर, कहाँ गया तेरा हौसला ??

अनजाने में खुद ही खीच ली उम्मीदों की रेखा,
अब पार जाना आसान सा नही हो रहा,
खुद ही पंख पसारे उड़े थे इन आसमां में कभी,
आज सहमे से लग रहे इन बादलों के बीच !
क्यों भूल रहा इन्ही पथरीली राहों पर ठेस खाकर,
किसी दिन बनाया था अपना खुद रास्ता …
रात की सुनसान बोझिल राहों पर खड़ा एक शख्स,
जैसे हँस रहा मुझ पर, कह कहो के शोर में कह रहा हो,
चल दौड़ लगाये एक बार फिर, कहाँ गया तेरा हौसला ??
Thoughts Origin : “Competing with Myself “
– Sujit

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/

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