Poetry

एक कोई – Anonymous Thoughts of Morning


चाँद रात की आगोश में था छुपा छुपा,
दिन हुए फिर ओझल हुआ जा रहा वही  !
ये कौन है जो इन से परे हक़ बता रहा कोई,
वक़्त की सारी कोशिशे है पास लाने की,
हर तरफ ऐसा लगता दूर जा रहा कोई !

आहट बता रहा तेरे होने की,
दिल सोचता आ रहा कोई और जा रहा कोई,
ख्वाबों ख्यालों में किस्से अनेको मिलते,
सच से रूबरू अब करा रहा कोई !

वक़्त मुताबिक नही न मुक्क्दरों से वास्ता,
हर लम्हों को फलक पर गिरा रहा कोई !

वो दिन तो बदल जायेगा किसी दिन,
गुजरते शाम सुबह जो कीमत चूका रहा कोई !

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/