Poetry

आहट सी हुई …

स्पंदन मात्र भी नहीं था चेहरों पर,
विस्मित ना हुए नयन भी थोड़े भी,
बड़ी ही क्षणिक अनुभूति सी थी..
जैसे पथराये से आँखों को छु गयी,
एक झलक सहलाती हुई दूर जाती !
जैसे भिगों गयी ओस की दो बूंद,
धरा की कोमल घासों को चूमती हुई !
जैसे दो शब्द में छुपे थे वही,
खुशबू आबो हवा सदियों बीती वाली,
हमारी रुंधे गले से निकले दो संगीत,
भ्रम हो या हो कोई सच सवेरे का,
आहट आज जानी पहचानी सी लगी,
किसी के वापस आने की इन गलियों में !
Sujit Kr..
Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/