अर्थविहीन – Meaningless

Meaningless Poetry

द्वन्द क्यों उठ गया आज,
जैसे अतीत खाते गोते लम्हों में,
दीवार पुरानी दरारे सीलन भरी,
बोझिल सा हुआ इरादा सहने का,
सुनी एक आवाज खुद से उठती !
ढाई दशक मिनटों में गुजरा ,
जो भटका राहों से दोराहे की ओर,
इंसान होने का बोझ सा हुआ,
सोच ऐसी कशमकश लिए जैसे निशब्द बोध सा हुआ,
दिया मानव मन और विचरने को दी अर्थविहीन राहे,
किस वास्ते मुझे थमा दी इंसान होने की जेहमत,
और कर दी मेरी कमजोर बाँहे, दुःख ना मिटा सकू सबका !
फिर भी दे रखी किस्मत, और उसे बदलने के सपने !
अबोध नहीं अक्षम्य बन जाता हूँ, दे कुछ रहमत कुछ रास्ता ! !
Thoughts :: Sujit

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज