पूर्णविराम – Epic Life !

मौन हूँ ..खो गया हूँ में आस पास;इस भीड़ में ! लड़खड़ा जाती है शब्दें,टूट जाती है पंक्तियाँ,पूर्ण कर दो अधूरे संवादों को,एक पूर्णविराम देकर ! विस्मित है मन,भ्रम कैसा …

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अर्थविहीन – Meaningless

द्वन्द क्यों उठ गया आज, जैसे अतीत खाते गोते लम्हों में, दीवार पुरानी दरारे सीलन भरी, बोझिल सा हुआ इरादा सहने का, सुनी एक आवाज खुद से उठती ! ढाई …

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