Poetry

अब वजह दे दो – Heart Thought !


सब्र की दुहाई मत दो लंबे फासलों सी..
कमजोर है बनावटी दिल ये टूट जायेगा !

या मुकम्मल वजह दो इसे बिखर जाने की..
हर फासलों पर इसका इम्तिहान ना लो !

यूँ उम्मीद बड़ी सजायी रखी थी उनसे..
गुमनाम ठोकरों ने खूब खेला इस दिल से !

उनकी खामोशी पर मुसकुराता रहा ये दिल ..
गुमसुम हँसी पर धुंध घिरता सा आ रहा !

इस मायूसी में खो के क्या सोच रहा ये दिल..
बिखरे टुकड़ो पर भी बढ़ जायेगा ये..
ना जाने फिर किस सफर किस रस्ते !

अब तो मुकम्मल वजह दे दो इसे बिखर जाने की !

@ सुजीत

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/

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