prime time political satire
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प्राइम टाइम – पोएट्री व्हेन संसद एडजर्नड

न चले रे हवा न मिले रे दुआ रुकी है संसद कैसे बने ये सभा । न तूने कुछ किया न मैंने कुछ किया; करोड़ों की अशरफी कौड़ी में खो दिया । बोते बीज बनाते बाँध बचाते बाढ़ ; खेतों की फसल को अख़बार खा गया, हर योजना बस ट्विटर पर छा गया ! बरसों से […]

indian farmer life
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प्राइम टाइम – खेत खलिहान से (व्यंग्य)

खेती व्यवसाय नहीं है ; कैसे होगा मिट्टी वाला पैर से उ लक्ज़री पॉलिश वाला मार्बल खराब नहीं हो जायेगा ! ” भारत एक कृषि प्रधान देश है ” ; निबंध का पहला लाइन पहले भी आज भी ; परीक्षा में भी नंबर दिलाता किसान ; भारत एक कृषि प्रधान देश है; भाषण का पहला […]

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प्राइम् टाइम – 2 में आज हम काले है तो क्या हुआ (व्यंग्य)

सरकार की सुस्तीकरन नीति से आज देश जहाँ तहाँ जल रहा, सर जी तुष्टि करण, सब गुड गोबड़ कर ही दिए अबे.. यार बीच में मत बोलों टेम्पो बिगड़ जाता समाचार का, वैसे क्या गलत है, सुस्ती करन किसी सरकार की किसी सरकार की तुष्टिकरण ! खुदो उकता जाते क्या बताये प्राइम टाइम में, इराक […]

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प्राइम् टाइम में आज .. कहने दो जी कहता रहे .. याहू !! (व्यंग्य)

सर जी १२ -१ बज गया है रात का .. ऊँघा गये होंगे सब प्राएम् टाइम कैसे ! धत बुरबक अभी तो नहा धो के सब फेसबुक ट्विटर पर आये ही होंगे ! यही तो हमारे ऑडिएंस है ; तब आज का दिखायेगें, अर्जेंटीनमा हार गया ; फसाद मचा दिए गुस्सा मैं सब ..चला दे […]