who talks a lot
Poetry

तुम भी कभी बहुत बोलते थे….

बातों का सिलसिला अब वैसा नहीं चलता, लम्बी फेहरिस्त होती थी बातों की, मैं पहले तो मैं पहले की तकरार, अब रुक रुक कर कभी कभार मैं कुछ पूछता, और ठहरे ठहरे से तुम भी कभी बोलते, मुँह फेर के तुम भी रहते, बेमन से मैं भी कुछ कह देता, बाँकी के खाली हिस्सों में, […]