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** मनसा वाचा कर्मणा**

** मनसा वाचा कर्मणा** एक प्रगतिशाल चिंतन के लिए जरुरी है – विरोध ! ! अगर आपका विरोध नहीं हो रहा तो, तो शायद आप किसी कार्य में प्रगतिशील नहीं है – लोग आपका आकलन करते, मतलब आपने कुछ ऐसा प्रयास किया है जो आकलन योग्य है ! बिना विरोध जरत्व आ जाता आपकी जिंदगी […]

सुबह को ये गुमां था

आज की सुबह को ये गुमां था , कोई उसे भी देख मुस्कुराता नजरे झुकाए ! चुप सा रह जाता ..ये सोच ये तो अल्हर फिजाए है जो भर देता उसे हर रोज, ये बातें भी महकती हवा सी है, बावरी हो उठती, और ले जाती कहीं दूर सी, और सुबह का ये गुमां, टूटता […]