Poetry

ये भागती जिंदगी कहाँ ले जाती ?

फसल सी हिलती डुलती भीड़, सड़कों पर हो आती .. ये पुरानी खेतें .. एक जिंदा शहर बन जाती ! कितनी तंग गलियों से गुजरते गुजरते, दूर जा के ये एक लंबी सी सड़क बन जाती ! पगडंडियों चलता, ऊँची नीची राहों फिसलता; अब सोचता खड़ा वहीं जमीं चलने लग जाती ! कहते दहशतगर्द होंगे […]

Poetry

मन – An Inner Inner Conscience

सुनी सी ये शाम है अब की,दिन दुपहरी लगती वैशाखी ! कुछ रंग फीके लगते इस जग के,ये मन अपना किस तलाश में भागे, कभी कोसता नाकामी पल को,लगा सपनों की पंख उड़ने को ! ख्वाब सजाता साथ हो कोई,ख़ामोशी में सुना बन कोई ! दीखते बदले रंग चेहरों की,एक जरिया ढूंढे खो जाने की […]