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Summer Leaves Poem

बिखरे पत्ते …

धूप चढ़ती हुई रोज … सूखे पत्ते टूट कर बिखरे बिखरे, जैसे कोई कह गया हो, अलविदा पुराने रिश्तों को । बदलते मौसम के साथ … खो रही नमी भी मन से, अब उजाड़ से तपते दिन होंगे, और होगी मायूसी से ऊँघते दोपहर । दिन ढल रहा है… बिखरे पत्तों को निहारता, टूटे मन […]