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evening view poetry

बीतते दिन का मंजर …

बीतते दिन का मंजर ऐसा है , जैसे उम्र पतझड़ सी जिंदगी । बोझिल मन ऐसा होता, जैसे शाम उतर आयी हो सीने में । झुरमुटों में कैद दिन का सूरज, ढल रहा है छितिज की सीमा पर । दिन का शबाब खत्म हो कर, अब धुंधली हो चली शाम सी । रोज ढलता रोज […]