Social Media Criticism – एक विचार

एक विचार : सोशल मीडिया की आलोचना

सोशल मीडिया की आलोचना करना वर्तमान संदर्भ में सर्वथा उचित नही है !
हर पक्ष के दो पहलु होते, परमाणु बम सी विध्वंशक शक्ति का उपयोग जापान के ऊपर विध्वंश के लिये हुआ, उसी जापान ने इसी परमाणु के उपयोग से विकास की परिभाषा लिख दी !


विज्ञान तो हमारे हांथो में एक शक्ति के तरह है – अब हम सृजन के शिल्पी बनते या विनाश के नायक..
दूरसंचार सेवाओं पर प्रतिबन्ध, सोशल मीडिया साईट पर सेंसर-व्यवस्था करना मुलत: समस्या का हल नही है !
सोशल मीडिया साईट पर आपत्तिजनक चीजों का सर्वत्र हो जाना, या हमारी ही समस्या को उजागर करता, ये दर्शाता विज्ञान की ढोल पिटने में हम कहीं पीछे छुट गए है!
 सरकार को नयी टेक्नोलोजी में सामंजस्य की पहल करनी चाहिए, सोशल मीडिया  विशेषज्ञ  की नियुक्ति, साइबर अपराध और नियंत्रण से जुरे विभागों को विकसित कर, कुशल लोगों को सम्मिलित करना, इस रूढ़ि प्रथा को तोड़ राजनीतिज्ञो को भी इस नयी पीढ़ी से कदमताल करना पड़ेगा !

अब विध्वंस या विकास किस पथ जाना ये खुद तय करना !

सुजीत

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज