I am competing with Myself – Life Motivating Poem By हरिवंश राय बच्चन

वक्त के किसी दोराहे पर खरे !
अच्छाई और बुराई के अंतरद्वंद में घिरे !
हरिवंश राय बच्चन जी की कुछ पंकियो को ,
आप अपने जिंदगी के बहुत करीब पाओगे !
शायद कई उलझे सवालो का जवाब इस कविता में है !!


मैंने शांति नहीं जानी है !– हरिवंश राय बच्चन

मैंने शांति नहीं जानी है !
त्रुटि कुछ है मेरे अन्दर भी ,
त्रुटि कुछ है मेरे बाहर भी ,
दोनों को त्रुटि हीन बनाने की मैंने मन में ठानी है !
मैंने शांति नहीं मानी है !
आयु बिता दी यत्नों में लग ,
उसी जगह मैं , उसी जगह जग ,
कभी – कभी सोचा करता अब , क्या मैंने की नादानी है !
मैंने शांति नहीं जानी है !

पर निराश होऊं किस कारण ,
क्या पर्याप्त नहीं आशवासन ?
दुनिया से मानी , अपने से मैंने हार नहीं मानी है !
मैंने शांति नहीं जानी है

प्रेषित : सुजीत कुमार लक्की

5 thoughts on “I am competing with Myself – Life Motivating Poem By हरिवंश राय बच्चन

  1. हरकीरत ' हीर'

    मैंने शांति नहीं जानी है !
    त्रुटि कुछ है मेरे अन्दर भी ,
    त्रुटि कुछ है मेरे बाहर भी ,
    दोनों को त्रुटि हीन बनाने की मैंने मन में ठानी है !

    अपनी की गलतियों का एहसास होना भी बहुत जरुरी है ……
    बच्चन जी की यह कविता जीवन जीने की प्रेरणा देती है …..!!

    Reply
  2. Siya ram sharma

    जीबन की सच्चाई से रूबरू कराती पंक्तियाँ औऱ हार न मान ने की प्रेरणा से भरी ‘बच्चन’जी की कविता।
    धन्यवाद ।

    Reply

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