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Summer Leaves Poem

बिखरे पत्ते …

धूप चढ़ती हुई रोज … सूखे पत्ते टूट कर बिखरे बिखरे, जैसे कोई कह गया हो, अलविदा पुराने रिश्तों को । बदलते मौसम के साथ … खो रही नमी भी मन से, अब उजाड़ से तपते दिन होंगे, और होगी मायूसी से ऊँघते दोपहर । दिन ढल रहा है… बिखरे पत्तों को निहारता, टूटे मन […]

Inbox Love ~ 13

आभासी दुनिया जहाँ निरंतर संवाद दूरियों को खत्म कर इनबॉक्स का ऐसा संसार बनाता जहाँ बस शब्दों का शब्दों से प्रेम होता | और कभी कभी उस संवाद विहीन इनबॉक्स को देख संवाद की जिजीविषा उत्कट हो जाती | वो बीता वक़्त जिसमें इंतजार था, उम्मीद थी, गुफ्तगू की लम्बी रातें और बोझिल आँखें थी […]

शोर ….

(वर्तमान परिदृश्य पर कुछ पंक्तियाँ …… ) कानों पर हाथ रख लेने से शोर खत्म नहीं होता, बस कुछ देर तक ही रोक पाते है, अपने आस पास के कोलाहल को । और फिर बन्द कानों के पार भी उतर जाती है वो आवाजें जो उठती है हक के लिए । विरोध के स्वर को […]

महामारी में मानवीय संवेदनाओं की आवश्यकता …

Follow SOP … Ensure Preventative Measure in COVID-19 !! क्या इतने शब्दों को लिख देना ही पर्याप्त हो सकता महामारी से लड़ने के लिए ; आज जहाँ परीक्षाओं पर पक्ष विपक्ष आमने सामने है | शिक्षण संस्थानों में नामांकन एवं अन्य प्रक्रियाओं का दौर चल रहा है साथ ही साथ महामारी के बढ़ते हालात भी […]

अलविदा सावन – Night&Pen

पूरा चाँद फलक पर है बीते सावन को अब अलविदा कहना है । आज पूरा चाँद जैसे अलविदा कह रहा हो किसी को, भींगे मन में… जैसे कुछ बिछड़ रहा हो कोई गीत जैसे बज कर अब सन्नाटे में खो गया हो । एक गीत जिसे फिर सुनना है उसी फुहारों के बीच, बारिश की […]

फेरीवाले की आवाज .. लॉक – अनलॉक जिंदगी !

गली में आवाजें लगाता वो, माथे पर बड़ी सी टोकड़ी जैसे, सामानों का जखीरा उठा रखा हो । उसकी आवाज़ें कौतूहल से भरी, विवश करती खिड़की से झाँकने को, बच्चे भी ठिठोली करते पुनरावृति में । उम्मीद से भरी वो आवाज की कोई आये, आजकल कोई आता नहीं निकल कर, न उसको घेरकर बैठती मोहल्ले […]