यारों बीते ना ये पल कभी !

हर मोड मे यूँ मिल जाते हो,
कैसे माने चले गए थे कहीं !

ख़ामोशी का सबब ले बैठते जब हम,
तो चुपके से गुन गुनाते हो कहीं !

मायूस से लगते जब कभी हम,
थोड़ा गुदगुदाते हो कहीं !

कैसे सम्हले हम ठोकरों से,
खुद ही राहों मे खड़े मिल जाते हो कभी !

शायद मान बैठे गैर सभी,
अपने का अहसास दिलाते हो कभी !

अब तक कैसे समझे चले गए,
साये से दिख जाते हो कभी !

खामोश होकर खुद रहते हो कहीं,
और यारों को बहुत रुलाते हो कभी !

जब भी पूछ बैठा मैं हाल तेरा,
खुद यारों से छुपाते हो कभी !

हम बन जाते जब मगरूर,
क्या पास कभी बुलाते हो कभी !

सोचता हूँ तेरे बारे में हर पल,
क्या सपनों में सजाते हो कभी !

ना रुप ना रंग देखा तेरा कहीं ,
बस दोस्ती का संग दिखाते हो कभी,

परेशां से हुए जो हुए कहीं इन राहों में,
खुदा सा बन के सजदे में झुकाते हो कभी !

Dedicated to all my friends ….Wish you all the friends Happy Friendship Day !
~ SUJIT

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