Poetry

यारों बीते ना ये पल कभी !

हर मोड मे यूँ मिल जाते हो,
कैसे माने चले गए थे कहीं !

ख़ामोशी का सबब ले बैठते जब हम,
तो चुपके से गुन गुनाते हो कहीं !

मायूस से लगते जब कभी हम,
थोड़ा गुदगुदाते हो कहीं !

कैसे सम्हले हम ठोकरों से,
खुद ही राहों मे खड़े मिल जाते हो कभी !

शायद मान बैठे गैर सभी,
अपने का अहसास दिलाते हो कभी !

अब तक कैसे समझे चले गए,
साये से दिख जाते हो कभी !

खामोश होकर खुद रहते हो कहीं,
और यारों को बहुत रुलाते हो कभी !

जब भी पूछ बैठा मैं हाल तेरा,
खुद यारों से छुपाते हो कभी !

हम बन जाते जब मगरूर,
क्या पास कभी बुलाते हो कभी !

सोचता हूँ तेरे बारे में हर पल,
क्या सपनों में सजाते हो कभी !

ना रुप ना रंग देखा तेरा कहीं ,
बस दोस्ती का संग दिखाते हो कभी,

परेशां से हुए जो हुए कहीं इन राहों में,
खुदा सा बन के सजदे में झुकाते हो कभी !

Dedicated to all my friends ….Wish you all the friends Happy Friendship Day !
~ SUJIT
Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/