महाभारत तो उसे बनानी थी

जाँच कभी परताल कभी..
हर राह परे बेहाल सभी ..
जो उस रात को तुम जब सोये वहीँ,
भाग गया काले धन का राज कहीं !
कोई टोपी वाला आया था,
ना वो दांडी जाने वाले थे,
ना नमक बनाने वाले थे !
ना राम नाम की लीला थी ..
खुद के जीवन में झाँको,
कुछ सबक सिखाने आये थे !
आज मैंने फिर सोचा,
खेतों से बार हटानी थी,
फिर बाटों कुछ हिस्सों में इसको,
मुझे ऐसी मेढ़ बनानी थी !
२० रूपये का मैं व्यापारी,
जेब की हालत क्या पूछो,
पेट भी बड़ी दीवानी थी !
सड़कों को दीमक ने चाटा,
फसलों ने प्यासा दम तोड़ा,
बिजली के तारों ने संग छोड़ा,
जब अनपढ़ हो घर में बैठा,
तब उनको लैपटॉप बटवानी थी,
सिक्को की खनक कहीं,
IPL की सनक कहीं !
खेलों की क्या बात करे,
अब इज्जत भी बेमानी थी !
धृतराष्ट्र कोई, पांचाली कोई,
भीष्म कोई, है द्रौण कोई !
ना कारण ना विवरण था,
वो देखो जो हँसता सब पर,
महाभारत तो उसे बनानी थी !

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज