Poetry

पूस के मेले – Winter @ India


लगे खेत में पूस के मेले,

सरसों अरहर मस्ती में खेले !

ठीठुरी पुरवा पवन बहके है हौले..
अलसी व गेहूँ की बालियाँ डोले !

विहंग तरंग बांस पर झूले,
खेत पर जाने अलसाते भूले !

आग लपेटे अलाव पर जब बोले,
शाम समेटे कई किस्सों को खोले !

धुप धुंध से आंख मिचोली खेले,
निर्जन मन कैसे इस शीत को झेले !

कोई रात विरह में नैना खोले,
कोई शांत शीत ओस संग सो ले,
कोई शरद शराब, तो कोई चाँद को छु ले !

निर्जन मन कैसे इस शीत को झेले !

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/

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