नकाबपोश रातें..Midnight Solitude

नकाबपोश रातें रातों सी जिंदगी ..
ना संवरती ना बिखरती !
गम था, पर दिखना था संजीदा,
नकाबपोश जो भीड़ में खरे थे !
बिखेरी, थोरी सी एक बनाई हुई हँसी,
जैसे आंसू सूखे रेत के चेहरों में फँसी !
मुखोटे लगाये चेहरों ने घेरा मुझे,
ना राग कोई, ना द्वेष कोई …
ना घृणा हुई ना तृष्णा हुई …
पता नही क्या समझा मुझे ..
थमा गया तलवार कोई तो ढाल कोई !
समझा नही इस जीवन को मैंने,
पर जान गया मैं राज कई !
सुजीत

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज

1 thought on “नकाबपोश रातें..Midnight Solitude

    वन्दना

    (December 9, 2011 - 6:17 am)

    आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
    तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा ।

    http://tetalaa.blogspot.com/

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