Poetry

झींगुर – Now Life on Urban Ladder

याद है वो सन्नाटा दस सवा दस का,
वो गाँव में जाते कभी छुट्टियों की रात,
झींगुरों की झन्न सी अनवरत ध्वनि,
आज भी कौतुहल सी करती मन में !

ये आवाज सन्नाटे में एक डर सा,
पर सुकून समेटे अनेकों रातों का !

आज शहर के शांत गगन में,
खोये रहते एक वीरान अधर में,
डूबे काले होते रातों के साये,
ना सन्नाटे का कोई आलम है !

ना झींगुर वो गीत सुनाता है,
ना जुगनू चमक दिखाता है !

कौतुहल तो अभी भी जारी है,
झाड़ी से निकल कर कहीं अलग,
मन में गूंज कुछ अलग झनक,
नींद खींच तान कर बस लगता,
कभी कभी झींगुर यहाँ भी गाती है !

#SK

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/