Poetry

जीने के बदले है ढंग – A Social Media Life !

जीने का कुछ ढंग बदला,
हमने भी अपना रंग बदला..
छत पर एंटीना की जगह ,
अब डिश टीवी ने ले ली..
कपड़े मे T-shirt का चलन बढ़ गया..
पर ‘T-shirt’ का ‘T’ कुछ ज्यदा ही लंबा हो गया..
मिलते जुलते अब थक गए है हम,
और ‘Facebbok’ पर बस रह गए है हम ..
मोबाइल से चिट्ठी तारे हो गयी कम ,
‘call u later’, ‘busy ‘ ये थे हमारे नए गम ..
माँ अब तेरी बातों को नही मान पाते हम..
न वक्त से खाते, पता नही कब सोते है हम..
कब तक इस दुनिया मे सीधे और सभ्य बन के बैठे..
पिताजी की इन बातों से शायद अब खीच बैठे हम अपने कदम !
वक्त ने अपनी चाल चल ली है,
चलो बढा ले हम अपने भी कदम..

रचना : सुजीत कुमार लक्की

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/

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