Poetry

ख़ामोशी लिपटी थी ….


कुछ यूँ बीती रात लंबी हो चली थी,
दबा रखे थे सवाल कई.. तुमसे पूछेगे..!
आज कोई फिर आके आवाज दे गया जैसे !

हो फिर मोह कोई तुझसे,
या तृष्णा कुछ, जो छुपी हो कबकी!

फिर कहीं अपनी ही बात,
हम मुग्ध हो बावरी बातों पर,
भूली पिछली हर यादों पर ..!

ये कैसे रोक दिया इन तूफानों को,
और भुला दिया उजरे पात साखों को !

छुपा लिये पिटारे हर जस्बात और सवालों के मैंने !
आज फिर मेरी ख़ामोशी खुशमिजाजी में जो लिपटी थी !

# सुजीत

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/