Poetry

एक ख़ामोशी शब्दों पर फैला …

साँझ जो पसरी धुँधला सवेरा,
घासों की गठरी, वो मैला कुचैला,
मटमैली हाथों में एक छोटा सा थैला,
लौटते खेतों से,नित की यही बेला !
बैठे ताकों में नभ भी रंगीला,
बात रात से, पड़ी काली सी साया,
घुप्प सी ख़ामोशी, जब शब्दों पर फैला,
फिर समझा जग को, ये पथ है पथरीला !
विस्मृत यादों पर जब कुछ ना जो उभरा,
छूटे सपनों पर दिखता पल पल का पहरा !
हर शाम समेटे एक रोज सवेरा,
वही राहें और एक खाली बसेरा !
क्रमशः …
नैपथ्य की ध्वनि के साथ गिरता परदा ..
और फिर ख़ामोश पड़ जाता ये रंगमंच !
Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

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