एक क्रिकेट मैच की वेदना

छुपते नही आंसू आब इन चेहरों में ,
इसे निकलने का एक जरिया दे दे !

बहुत मायूस इस भीड़ में हम,

बस रोने का एक कंधा दे दे !

बहुत लड़ चूका अपनी कीस्मत से ….

मेरे खुदा तू मुझे कब तक आज्म्येगा …..

एक रोज की साम ही थी ये क्रिकेट मैच लेकिन ,
कुछ उमीदो को यूँ ढहते देख मन वेदना से भर गया,
आज पहली बार sachin के आँखों में ३ रन की अहमियत देखी,
लग रही थी आंसू के सैलाब को भीड़ ने रोक रखा हो
बस हमारा मन भी भावनाओ से आहात हुआ जा रहा
काश हम जीत जाते , एक शतकवीर ३ रन के लए तरस गया ..


रचना : सुजीत कुमार लक्की

13 thoughts on “एक क्रिकेट मैच की वेदना

  1. सुलभ सतरंगी

    इस खेल ने सब कुछ दिया हमको
    फिर भी मंजिल मुझसे रूठी बैठ है.

    …सिर्फ यही कह सकता हूँ मैं सचिन की पीडा देखकर.

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  2. Manoj Kumar Soni

    सच कहा है
    बहुत … बहुत .. बहुत अच्छा लिखा है
    हिन्दी चिठ्ठा विश्व में स्वागत है
    टेम्पलेट अच्छा चुना है. थोडा टूल्स लगाकर सजा ले .
    कृपया वर्ड वेरिफ़िकेशन हटा दें .
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    Reply
  3. sanjaygrover

    हुज़ूर आपका भी एहतिराम करता चलूं…….
    इधर से गुज़रा था] सोचा सलाम करता चलूं

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  4. ह्रदय पुष्प

    खेल तो खेल है फिर भी – लग रही थी आंसू के सैलाब को भीड़ ने रोक रखा हो बस हमारा मन भी भावनाओ से आहात हुआ जा रहा काश हम जीत जाते, एक सतकवीर ३ रन के लए तरस गया .. भावनात्मक एवं प्रशंसनीय.

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