उलझा दिया आज फिर सवालों ने !

परतों में रखा था छुपा के हमने खमोशी !
खोल दी जो थोरी सी हवा उठी किसी ओर से !

थोरी दूर जा के अहसास सा होने लगा !
अब कोई लौटने वाला नही इन राहों से !

मेरी बातों की गुजारिश ऐसी हुई खाली !
जैसे कोई ख्वाब जला गया हो सीने से !

देखे न दिखे मेरे चेहरे पर एक उमंग !
आज फिर पाया वहाँ बस सवालों का संग !

उलझा दिया आज फिर सवालों ने !

:सुजीत
(शब्दों का साथ नही था , थोरी उलझ गयी बातें भावो को चुन ले !)

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज

1 thought on “उलझा दिया आज फिर सवालों ने !

    राकेश कौशिक

    (March 15, 2011 - 4:48 am)

    “परतों में रखा था छुपा के हमने खमोशी !
    खोल दी जो थोरी सी हवा उठी किसी ओर से !”

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