Poetry

इक ख्वाब था…!

शाम अधूरी, अधखुली नींद से..
इक ख्वाब था वो, अधूरा सा छुटा !

मन विस्मृत, एक डगर को चला,
दूर कदम पर, एक भीढ़ सी टोली !

हाट कोई था, फल सब्जी के ठेले,
एक कोने में मचल रहा रंगीन गुब्बारा,
ठिठका वहीं, भा गये गुब्बारें !

सोचा ले मैं क्या करता उसको,
देख फिर उन रंगों को निहारे !

भटक हाट के दो फेरे लगाये,
मन खोया था उस ख्वाब किनारे !

बिखरे बिखरे शाम को छोड़े,
आँखे कहती फिर एक रात बुलाये !

नींद बिखरे है, ख्वाब पसारे,
चाँद से पूछा क्या मन में तुम्हारें !

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/