Poetry

आज मे अपने गाँव चला …Going To Home !


आज मे अपने गाँव चला …

कुछ ममता मिल जाये आँचल की,
आज फिर उनको लेने चला !

जिन गलियों मे बीता मेरा बचपन,
आज फिर उनको जीने चला !

कुछ नजरे बोझिल राहों पर ,
उनको मे तर करने चला !

कुछ नजरे हो अनजानी सी,
उनसे भी गले मे मिलने चला !

दादी अम्मा ने कहा “वक्त का कहाँ भरोसा “
मैं वक्त के साथ दौर लगाने चला !

आती जाती बिजली हो..
उबार खबर रस्ते हो..
इन्टरनेट मेट्रो की दुनिया से,
अपनी मिट्टी पर मैं जीने चला .

आज मे अपने गाँव चला …

रचना : सुजीत कुमार लक्की
Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/

10 thoughts on “आज मे अपने गाँव चला …Going To Home !

  1. कुछ नजरे बोझिल राहों पर ,
    उनको मे तर करने चला !
    बहुत बहुत शुभकामनायें। अपनो से मिलने का सुख और गाँव का जीवन अब तो सुखद सपना सा बन गया है। मगर अभी भी बहुत कुछ है गाँवों मे जो हमे अपनी और खीँचता है।

  2. अपनी मिट्टी पर मैं जीने चला .
    अपनी मिट्टी पुकार ही लेती है
    और फिर मैं भी आज अपने गाँव जा रहा हूँ

  3. वर्तमान संक्रमण के युग मे तेजी से मरती जा रही ग्रामीण संस्कृति को बचाने की महत्ती आवश्यकता है गाँव की याद दिलाती रचना हेतु साधुवाद।

  4. चलो कम से कम कुछ दिन तो प्राकृतिक वातावरण में रहोगे..बाकि इस कंक्रीट के जंगल में सिवाय टेंशन के रखा क्या है..

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