अब मुझे इन्तेजार कहाँ ! – A Poem

अब मुझे कोई इन्तेजार कहाँ !
तेरी मायूसी का ऐतबार कहाँ !
यूँ भागे है किस तरफ तब से ,
की अब हमे चैन कहाँ !
पिघल जाये ये दिल आंसुओं  से ,
पर उन्हें रोकने वाले हाथ कहाँ !
क्यों रुक जाये हम जाने से ,
मुझे रोकने वाले वो आवाज कहाँ !
अब मुझे कोई इन्तेजार कहाँ…
 
रचना : सुजीत कुमार लक्की

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज

6 thoughts on “अब मुझे इन्तेजार कहाँ ! – A Poem

    संजय भास्कर

    (May 15, 2010 - 7:02 am)

    बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    संजय भास्कर

    (May 15, 2010 - 7:03 am)

    अब मुझे कोई इन्तेजार कहाँ…

    बहुत खूब, लाजबाब !

    संजय भास्कर

    (May 15, 2010 - 7:03 am)

    ग़ज़ब की कविता … कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है

    संजय भास्कर

    (May 15, 2010 - 7:05 am)

    काफी सुन्दर शब्दों का प्रयोग किया है आपने अपनी कविताओ में सुन्दर अति सुन्दर

    रश्मि प्रभा...

    (May 22, 2010 - 2:34 am)

    पिघल जाये ये दिल आंसुओं से ,
    पर उन्हें रोकने वाले हाथ कहाँ !
    ………….
    bahut sahaj khyaal

    E-Guru Rajeev

    (May 29, 2010 - 4:45 am)

    ये बात तो ठीक नहीं !!
    प्रतीक्षारत रहिये.
    हिम्मते मरदां ते मददे खुदा.

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