Poetry

ढूंढे तो चैन कहाँ की ..

बैचनी जैसे शब्द इन्तहा की, कभी बन जाते दर्द ये जुबां की .. चुप सी रहती, कमी है एक बयाँ की, बेचैन मन की चाह, ढूंढे तो चैन कहाँ की .. खफा सी सूरत, सितम है शमां की, जुदा हुई बात, असर दिखा गुमां की .. बैचनी में छुपी राह,ये बातें है उस जहाँ की, […]