मन – An Inner Inner Conscience

सुनी सी ये शाम है अब की,दिन दुपहरी लगती वैशाखी ! कुछ रंग फीके लगते इस जग के,ये मन अपना किस तलाश में भागे, कभी कोसता नाकामी पल को,लगा सपनों …

Read More